(सफलता) सफालाता की ताय्यारी [जिंदगी बदालाते हिंडी कहियायान] शाहर से कुच दरवाजा एक बुजुर्ग दंपते राहाते। वो जगाह बिलाकुल शांत था और अस-पास ikka -dukka लॉग हे नज़र एट द। एक दिन में मेरा अनहोन देखा एक युकक हैथ मेरा फावड़ा के झूठ सिकिल से काहेन जा राहा है, वु कुच दे बाद दीया गया और फिर कभी नजदेक हो गया। थम्पाम्पाते ने कहा कि बाट पर ध्यान दीया गया, पर अगाले दीन फिर से विक्ति उधर से दीखाता है .ब से मोनो आप रोज की बात कर रहे हैं, वा विक्ति रोज फावड़ा के झूठ उधर से गुजरता और थोडे डर मेन आंखों से ओजल होप्स hai। दम्पातेई ससुआना इलाके मेइन है तराह के किसे रोज़ रोज़ -जाणे से कुच परेशान हो गया और वका उसाका पेखे कराने का फैसलाला जाता है। अगल दीन याब अनक घर के समेने से गुजारा से दंपती भी अपने गाडे से यूकेक पेचहे -पेचहे चालेन लेज। कुच दरवाजा जाणे के बाद वह एक पेड के पास रुक और अपन साइकल वाही कदे कर और बुद्धने लागा। 15-20 कदम चलेन के बाद वू रुका और अपने फावड़े से ज़मीन खोडने लागा। दंपतते को तुम बा...